तो क्या महाभारत काल से जुड़ा है ! नागो का रहस्य

नागो की उत्पत्ति :

कद्रू और विनता दक्ष प्रजापति की पुत्रियाँ थीं और दोनों कश्यप ऋषि को ब्याही गई थीं। एक बार कश्यप मुनि अपनी दोनों  पत्नियों से प्रसन्न होकर उन  से वरदान माँगने को कहा । तो उनकी पहली पत्नी कद्रू ने एक सहस्र पराक्रमी सर्पों की माँ बनने की प्रार्थना की और उनकी दूसरी पत्नी  विनता ने केवल दो पुत्रों की l किन्तु उनका कहना था कि उनके दोनों  पुत्र देवी कद्रू के पुत्रों से अधिक शक्तिशाली पराक्रमी और सुन्दर हों। देवी कद्रू ने 1000 अंडे दिए और देवी  विनता ने दो। कुछ समय बाद कद्रू के 1000 अंडों से 1000 सर्पों का जन्म हुआ। और विनता के 2 अंडो से 2 सर्पों का जन्म हुआ।%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf

इन्ही के पुत्र थे वासुकी, शेष, पद्म, कंबल, कार कोटक, नागेश्वर, धृतराष्ट्र, शंख पाल, कालाख्य, तक्षक, पिंगल, महा नाग आदि ,देवी कद्रू के बेटों में सबसे पराक्रमी शेषनाग थे। इनका एक नाम अनन्त भी है।

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