क्‍या आप जानते हैं शिखा रखने के ये वैज्ञानिक फायदे ?

शिखा रखने के फायदे

  1. जिस जगह शिखा (चोटी) रखी जाती है, यह शरीर के अंगों, बुद्धि और मन को नियंत्रित करने का स्थान भी है।
  2. शिखा, मस्तिष्क के संतुलन का भी बहुत बड़ा कारक है।
  3. शिखा रखने से मनुष्य प्राणायाम, अष्टांगयोग आदि यौगिक क्रियाओं को ठीक-ठीक कर सकता है।
  4. शिखा रखने से मनुष्य की नेत्रज्योति सुरक्षित रहती है।
  5. शिखा रखने से मनुष्य स्वस्थ, बलिष्ठ, तेजस्वी और दीर्घायु होता है।
  6. यजुर्वेद में शिखा को इन्द्रयोनी कहा गया है। ब्रह्मरन्ध्र ज्ञान, क्रिया और इच्छा इन तीनों शक्तियों की त्रिवेणी है। यह मस्‍तिष्‍क के अन्य भागों की अपेक्षा ब्रह्मरन्‍ध्र को अधिक ठंडापन स्पर्श करता है। बाहर ठंडी हवा होने पर भी यही केशराशि ब्रह्मरंध्र में पर्याप्त ऊष्णता बनाए रखती है।
  7. ब्रह्मरन्ध्र की ऊष्णता और पीनियल ग्लेंड्स की संवेदनशीलता को बनाए रखने हेतु शिखा कि रचना की गई है।

शिखा बंधन और विधान

पूजा-पाठ के समय शिखा में गांठ लगाकर रखने से मस्तिक में संकलित ऊर्जा तरंगें बाहर नहीं निकाल पाती हैं। इनके अंतर्मुख हो जाने से मानसिक शक्तियों का पोषण, सद्बुद्धि, सद्विचार आदि की प्राप्ति, वासना की कमी, आत्मशक्ति में बढ़ोत्तरी, शारीरिक शक्ति का संचार, अवसाद से बचाव, अनिष्टकर प्रभावों से रक्षा, सुरक्षित नेत्र ज्योति, कार्यों में सफलता तथा सद्गति जैसे लाभ भी मिलते हैं।

संध्या विधि में संध्या से पूर्व गायत्री मन्त्र के साथ शिखा बंधन का विधान है। इसके पीछे एक संकल्प और प्रार्थना है। किसी भी साधना से पूर्व शिखा बंधन गायत्री मन्त्र के साथ होता है, यह एक सनातन  परम्परा है।

मन्त्र उच्‍चारण और अनुष्‍ठान के समय शिखा को गांठ मारने का विधान है। इसका कारण यह है की गांठ मारने से मन्त्र स्पंदन द्वारा उत्पन्न होने वाली उर्जा शारीर में ही एकत्रित होती है और शिखा की वजह से यह उर्जा बहार जाने से रुक जाती है। जिससे हमें मन्त्र और जप का सम्पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।

शिखा को बांधने का मन्त्र है

चिद्रूपिणि महामाये दिव्यतेजः समन्विते ।
तिष्ठ देवि शिखामध्ये तेजोवृद्धि कुरुवमे ।।

About Sanatan Times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*