क्‍या आप जानते हैं शिखा रखने के ये वैज्ञानिक फायदे ?

मान्यता के तहत परम्परा है कि प्रत्येक स्त्री तथा पुरुष को अपने सिर पर चोटी यानि कि बालों का समूह अनिवार्य रूप से रखना चाहिये।क्‍या है शिखा ?

सनातन धर्म में प्रारंभ से ही शिखा को ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। सनातन धर्म में यह एक अनिवार्य परंपरा है, मान्‍यता है कि इससे व्यक्ति की बुद्धि नियंत्रित होती है। भारत में सिर पर शिखा रखने की परंपरा को इतना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है कि इस कार्य को आर्य (सत्‍य) संस्‍कृति से भी जोड़कर भी देखा जाता है।

7A0ECBE7-88E2-4130-B63F-71535189EA7E_L_styvpf

इस परम्परा का जहां धार्मिक विश्वास है, तो वहीं वैज्ञानिक महत्व भी है। जिसे आधुनिक काल में वैज्ञानिकों द्वारा सिद्ध भी किया जा चुका है। शिखा रखने के पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण है, आइए जानते हैं।

वैज्ञानिक दृष्‍टिकोण

मानव खोपड़ी के पीछे के अंदरूनी भाग को संस्कृत में ‘मेरुशीर्ष’ और अंग्रेजी में “Medulla Oblongata” कहते हैं। यह मानव देह का सबसे ज्‍यादा संवेदनशील भाग माना जाता है। मेरुदंड की सब शिराएं यहीं पर मस्‍तिष्‍क से जुड़ती हैं। यह भी बता दें कि मानव खोपड़ी के इस भाग का कोई ऑपरेशन नहीं हो सकता। मान्‍यता है कि देह में ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवेश यहीं से होता है।

3EAF9182-8CFF-49D9-ABF3-CDB7D9CE2F52_L_styvpf

भू-मध्य में आज्ञा चक्र इसी का प्रतिबिम्ब है। योगियों को नाद की ध्वनि भी यहीं सुनाई देती है। देह का यह भाग ग्राहक यंत्र (Receiver) का काम करता है। शिखा सचमुच में ही रिसीविंग एंटीना का कार्य करती है। शिखा धारण करने से यह भाग अधिक संवेदनशील हो जाता है।

योग और अध्यात्म को सुप्रीम सांइस मानकर जब आधुनिक प्रयोगशालाओं में रिसर्च किया गया तो, चोटी के विषय में बड़े ही महत्वपूर्ण ओर रौचक वैज्ञानिक तथ्य सामने आए।

चमत्कारी रिसीवर

असल में जिस स्थान पर शिखा यानि कि चोटी रखने की परंपरा है, वहां पर सिर के बीचों-बीच सुषुम्ना नाड़ी का स्थान होता है। तथा शरीर विज्ञान यह सिद्ध कर चुका है कि सुषुम्‍ना नाड़ी इंसान के हर तरह के विकास में बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। चोटी, सुषुम्‍ना नाड़ी को हानिकारक प्रभावों से तो बचाती ही है, साथ में ब्रह्माण्ड से आने वाले सकारात्मक तथा आध्यात्मिक विचारों को ग्रहण भी करती है।

क्‍या कहता है योगशास्‍त्र ?  

योगशास्त्र में इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों की चर्चा होती है। इनमें सुषुम्ना ज्ञान और क्रियाशीलता की नाड़ी है। यह मेरुदंड (स्पाईनल कॉड) से होकर मस्तिष्क तक पहुंचती है। इस नाड़ी के मस्तिष्क में मिलने के स्थान पर शिखा बांधी जाती है। शिखा बंधन मस्तिष्क की ऊर्जा तरंगों की रक्षा कर आत्मशक्ति बढ़ाता है।

 आगे स्लाइड में पढ़े शिखा रखने के 7 फायदे ….
पिछला1 of 2अगला

About Sanatan Times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*