संस्‍कृत में है दम, लोहा मानते हैं कई देश, कई विभाग… जाने कैसे

आदर्शवाक्‍य के रूप में संस्‍कृत ही क्‍यों ? भारत में आप चाहे जहां भी जाएं, जिस भी विश्‍वविद्यालय में पढ़ें या किसी भी सरकारी कार्यालय या संबद्ध संस्‍थाओं की ओर रुख अख्‍तियार करें आपको संस्‍कृत के सूक्‍त दीवारों पर टंगे मिल ही जाएंगे। सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसा क्‍यों है, क्‍यों संस्‍कृत के ही सूक्‍तों को भारत में आदर्शवाक्‍य माना गया है? इन सवालों के जवाब भी हम आपको देंगे, लेकिन उससे पहले ये जान लेना जरूरी है कि संस्‍कृत के सूक्‍त भारत सहित दुनिया के कई देशों के आदर्श वाक्‍यों में आज भी शामिल हैं।

क्‍योंकि उच्‍चतम आदर्श की भाषा है संस्‍कृत

वाराणसी स्‍थित सम्‍पूर्णानन्‍द संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय में ‘तुलनात्‍मक दर्शन’ के प्रोफेसर डॉ. रजनीश शुक्‍ल ने ईनाडु इंडिया से विशेष बातचीत में बताया, ”संस्‍कृत उच्‍चतम आदर्श की भाषा है। देव भाषा तो ये है ही, इसके अलावा भारतीय संस्‍कृति की आत्‍मा भी संस्‍कृत भाषा में ही बसी हुई है। चूंकि, सांस्‍कृतिक मूल्‍यों के बिना मानव जीवन की कल्‍पना भी नहीं की जा सकती और ये सारे सांस्‍कृतिक मूल्‍य संस्‍कृत में ही समाए हुए हैं, इसलिए इन्‍हें आदर्श वाक्‍यों के रूप में अपनाया गया है।”

प्रो. रजनीश के अनुसार भारतीय महाद्वीप और एशियाई देशों के विपरीत यूरोपीय देशों में लैटिन और ग्रीक भाषा उनकी संस्‍कृति से जुड़ी है, यही कारण है कि यूरोपिय देशों के आदर्श वाक्‍य अक्‍सर लैटिन या ग्रीक भाषा में मिलेंगे। प्रो. रजनीश जोड़ते हैं कि लैटिन अब जहां मृतभाषा मान ली गई है वहीं संस्‍कृत आज भी एक जीवंत भाषा है। प्रो. रजनीश इसे भविष्‍य के विश्‍व की भाषा भी मानते हैं।

तो आइए जानते हैं संस्‍कृत भाषा के किन-किन सूक्‍तों को भारत सहित अन्‍य देशों ने अपने आदर्शवाक्‍य बनाए हैं।

देशों के आदर्श वाक्‍य

  1. भारत संघ – सत्‍यमेव जयते
  2. नेपाल –  जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
  3. एश प्रांत –   पञ्चचित
  4. इंडोनेशिया – जलेष्वेव जयामहे

 

सेना और पुलिस के आदर्श वाक्‍य

  1. भारतीय वायुसेना – नभ:स्‍पृशं दीप्‍तम् (श्रीमद्भागवत गीता)
  2. भारतीय तटरक्षक – वयम् रक्षामः
  3. भारतीय नेवी – शं नो वरुणः
  4. भारतीय एयरफोर्स – नभःस्पृशं दीप्तम्
  5. मुम्‍बई पुलिस – सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय
  6. राजपुताना राइफल्‍स – वीरभोग्या वसुन्धरा

 

सरकारी विभागों और संस्‍थानों में संस्‍कृत

 

  1. सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया – यतो धर्मस्ततो जयः
  2. गोवा – ‘सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्‌भवेत्
  3. जीवन बीमा निगम – योगक्षेमं वहाम्यहम्
  4. ऑल इंडिया रेडियो – बहुजनहिताय बहुजन‍सुखाय‌
  5. इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट – आदित्यात् जायते वृष्टिः
  6. दूरदर्शन –  सत्‍यं शिवम सुंदरम
  7. इंटेलिजेंस ब्‍यूरो (IB) – जागृतं अहर्निशं
  8. रॉ – धर्मो रक्षति रक्षित:
  9. उत्‍तर प्रदेश पुलिस – परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्
  10. आयकर विभाग – कोष मूलो दण्‍ड:
  11. भारतीय सांख्‍यिकी संस्‍थान – भिन्नेष्वैक्यस्य दर्शनम्
  12. सीबीएसई –  असतो मा सद्गमय

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