इसलिए दंतेवाड़ा का रक्षक कहा जाता है 3000 फीट की उंचाई पर विराजे गणपति जी को

छह फीट उंची है भगवान गणेश की प्रतिमापहाड़ी पर स्थापित गणेश प्रतिमा लगभग 6 फीट ऊंची और 21  फीट चौड़ी ग्रेनाइट के पत्थरों से बनी हुई है। वास्तुकला की दृष्टि से यह प्रतिमा अत्यंत ही कलात्मक नजर आती है। इस प्रतिमा में भगवान गणेश ऊपरी दाएं हाथ में फरसा, ऊपरी बाएं हाथ में टूटा हुआ एक दंत, निचले दाए हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला तथा नीचे बाएं हाथ में मोदक धारण किए हुए है। पुरात्वविदों की मानें तो इस प्रकार की प्रतिमा बस्तर क्षेत्र में और कहीं नहीं मिलती है।

0616AB7F-9286-4119-A5C0-7CD9ED4E958A_L_styvpf

यही हुआ था भगवान गणेश व परशुराम का युद्ध

इस क्षेत्र को दक्षिण बस्तर या आंध्र में वाड़ा कहा जाता है। यही कारण है कि दंतेश के क्षेत्र का नाम दंतेवाड़ा पड़ा। इस क्षेत्र में एक कैलाश गुफा भी है। इसे लेकर ऐसी मान्यता है कि यह वही कैलाश क्षेत्र है, जहां भगवान गणपति और परशुराम के बीच घनघोर युद्ध हुआ था। दंतेवाड़ा से ढोलकर पहुंचने के मार्ग में एक गांव परसपाल मिलता है, मान्‍यता है कि ये नाम भगवान परशुराम के नाम पर ही पड़ा है। वहीं इसके आगे का ग्राम कोतवालपारा कहलाता है। कोतवाल का अर्थ रक्षक होता है।

दंतेवाड़ा क्षेत्र के रक्षक हैं श्रीगणेश

मान्यताओं के अनुसार इतनी ऊंची पहाड़ी पर भगवान गणेश की स्‍थापना नागवंशी शासकों ने की थी। गणपति के उदर पर एक नाग का चिह्न भी मिलता है। कहा जाता है कि मूर्ति का निर्माण करने के दौरान नागवंशियों ने यह चिह्न भगवान गणेश पर अंकित किया होगा। कला की दृष्टि से यह मूर्ति दसवीं-ग्‍यारहवीं शताब्दी की प्रतिमा कही जा सकती है।

5981EE2E-3145-4A85-9219-8A98A2AD422F_L_styvpf

 

 

 

About Sanatan Times

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*