गरुड़पुराण के अनुसार नहीं करना चाहिए इन 10 लोगो के घर पर भोजन …

हम अक्सर कभी न कभी किसी के घर मेहमान बन कर जाते है और ऐसे में हमारी मेहमान नवाज़ी भी बहुत होती है ! वैसे इस मेहमान नवाज़ी में भोजन खिलाने हेतु सभी चीज़े शामिल है ! पर क्या आप जानते है यू ही किसी के घर भोजन करना कई बार आपके लिए अनुपयोगी साबित हो सकता है ! जी हां हम आपको बताते है कि किन लोगों के घर भोजन ग्रहण करना आपके लिए हानिकारक हो सकता है ! शायद आपको ये बातें थोड़ी विचित्र लगे पर ये एक तरह का सच ही कही जा सकती है !

वैसे भी एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है कि जैसा खाएंगे अन्न वैसा बनाएंगे मन ! तो चलिए आपको थोड़ा ऐताहासिक रूप से भी समझाते है ! ऐसा कहा जाता है कि इंसान जिस तरह का भोजन करता है उसका मन और विचार भी वैसे ही हो जाते है ! यहाँ तक कि इसका असर उसके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है ! इसका सबसे अच्छा उदाहरण तो महाभारत में ही मिलता है !

जब तीरों की शैय्या पर पड़े भीष्म पितामह से द्रोपदी पूंछती है कि “आखिर क्यों उन्होंने भरी सभा में मेरे चीरहरण का विरोध नहीं किया जबकि वो सबसे बड़े और सबसे सशक्त थे।” तब भीष्म पितामह कहते है कि मनुष्य जैसा अन्न खता है वैसा ही उसका मन हो जाता है। उस वक़्त मै कौरवों का अधर्मी अन्न खा रहा था ! इसलिए मेरा दिमाग भी वैसा ही हो गया और मुझे तब कुछ गलत नज़र नहीं आया। हमारे समाज में एक परंपरा काफी पुराने समय से चली आ रही है कि लोग एक-दूसरे के घर पर भोजन करने जाते हैं। कई बार दूसरे लोग हमें खाने की चीजें देते हैं। वैसे तो यह एक सामान्य सी बात है, लेकिन ऐसी स्थिति मे हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि किन लोगों के यहां हमें भोजन नहीं करना चाहिए।

1. कुछ लोगों का स्वभाव होता है कि वे हमेशा दुसरो के द्वारा दिया गया भोजन ही खाते है और ऐसे लोग पूरी तरह स्वार्थी होते है क्यूंकि उन्हें केवल स्वादिष्ट खाने से मतलब होता है ! ऐसे लोग खाने के लिए हमेशा दुसरो पर ही निर्भर करते है ! वे आये दिन किसी न किसी के घर जाकर ही खाना पसंद करते है ! ऐसे मे यदि हम ऐसे किसी व्यक्ति के घर जाए तो हम भी अपने पापो मे वृद्धि करते है ! क्यूंकि खाना तभी फलता है जब उसे मेहनत से कम कर खाया जाये ! या किसी को खिलाया जाये न कि दुसरो से मांग कर !

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2.इसके इलावा यदि कोई व्यक्ति चोर है या न्यायालय में उसका अपराध सिद्ध हो गया हो तो उसके घर का भोजन नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार चोर के यहां भोजन करने पर उसके पापों का असर भी हमारे जीवन पर हो सकता है। इसलिए कभी किसी ऐसे व्यक्ति के घर खाने के लिए नहीं जाना चाहिए जो बुरे विचार रखता हो ! या जो बुराई को बढ़ावा देते हो ! ऐसे मे इसका प्रभाव आपके मन विचार पर भी बुरा पड़ता है !

3.घर मे भोजन अक्सर महिलाओ द्वारा ही बनाया जाता है ! तो ऐसे मे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि चरित्रहीन स्त्री के हाथ से बना हुआ या उसके घर पर भोजन नहीं करना चाहिए। यहां चरित्रहीन स्त्री का अर्थ है कि जो स्त्री स्वेच्छा से पूरी तरह अधार्मिक आचरण करती है। गरुड़ पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति ऐसी स्त्री के यहां भोजन करता है, वह भी उसके पापों का फल प्राप्त करता है। यानि जो स्त्री धर्म कर्म मे विश्वास न रखती हो या दुर्व्यवहार का आचरण रखती हो ऐसे स्त्री के घर खाना ग्रहण नहीं करना चाहिए !

4.कई लोगों की आदत होती है कि वे दुसरो के दुखो का फायदा उठा कर उनसे अपना काम निकलवाते है और ये आज के ज़माने का दस्तूर भी है ! पर ये बिलकुल सही नहीं है ! वैसे भी आज के समय मे काफी लोग ब्याज पर दूसरों को पैसा देते हैं, लेकिन जो लोग दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए अनुचित रूप से अत्यधिक ब्याज प्राप्त करते हैं, गरुड़ पुराण के अनुसार उनके घर पर भी भोजन नहीं करना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में दूसरों की मजबूरी का अनुचित लाभ उठाना पाप माना गया है। गलत ढंग से कमाया गया धन, अशुभ फल ही देता है। इसका असर हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है !

5.इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो या कोई व्यक्ति छूत के रोग का मरीज हो तो उसके घर भी भोजन नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति के यहां भोजन करने पर हम भी उस बीमारी का शिकार हो सकते हैं। लंबे समय से रोगी इंसान के घर के वातावरण में भी बीमारियों के कीटाणु हो सकते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए इस बात का खास ध्यान रखे !

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