जानिए..आखिर क्यूँ करना पड़ा समुद्र मंथन का निर्माण..

यु तो आज तक हमने सिर्फ समुद्र मंथन के बारे में सुना ही है ! पर असल में समुद्र मंथन का निर्माण क्यूं और कैसे हुआ और इसके पीछे क्या कारण था ये बहुत कम लोग जानते है ! पर इतिहास को जानने का आनंद भी तभी आता है जब हम अपने इतिहास के बारे में सही तरह से कुछ न जानते हो क्यूकि इससे रहस्य बना रहता है ! तो चलिए आज आपको समुद्र मंथन के बारे में कुछ बताते है ! दरअसल समुद्र मंथन की गाथा ये है कि पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन धनवंतरि त्रयोदशी मनाई जाती है।मान्यता के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है। समुद्र मंथन से धन्वतंरि के साथ अन्य रत्न भी निकले थे। वैसे इस समुद्र मंथन के पीछे लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र भी छुपे हुए है ! अब आप सोच रहे होगे कि ये लाइफ मैनेजमेंट है क्या तो आगे पढ़ते जाइए आपको सब समझ आ जायेगा !

समुद्र मंथन की कथा..धर्म ग्रंथों के अनुसार, एक बार महर्षि दुर्वासा के श्राप के कारण स्वर्ग श्रीहीन हो गया यानि वहां का धन और सुख सुविधा और वैभव सब चला गया। तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने उन्हें असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने का उपाय बताया और ये भी बताया कि समुद्र मंथन से अमृत निकलेगा, जिसे ग्रहण करने के बाद तुम अमर हो जाओगे। यह बात जब देवताओं ने असुरों के राजा बलि को बताई तो वे भी समुद्र मंथन के लिए तैयार हो गए। वासुकि नाग की नेती बनाई गई और मंदराचल पर्वत की सहायता से समुद्र को मथा गया। समुद्र मंथन से उच्चैश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, लक्ष्मी, भगवान धन्वन्तरि सहित 14 रत्न निकले। अब आप समझ ही सकते है कि उस समय समुद्र मंथन करना कितना जरुरी था ! वैसे इसकी गाथा केवल यही पर समाप्त नहीं होती !

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