चाणक्य नीति के इन सूत्रों से आप परख सकते है किसी भी स्त्री या पुरुष को…

हम सब ऐसे समाज में रहते है जहाँ ाचे लोग भी है और बुरे लोग भी पर कई बार हम अच्छे और बुरे में फर्क नहीं कर पाते ! अक्सर ऐसा होता है कि बुरे लोग अच्छाई का दिखावा करते है और हमारा फायदा उठाते है ! पर अब ऐसा नहीं होगा ! जी हा अब किसी भी व्यक्ति को परखने के लिए गुरु चाणक्य ने एक बहुत ही व्यवस्थित नीति बताई है जिससे हम इंसानो की परख कर सकने में सक्षम हो सकते है ! आइए आपको बताते है कि आखिर ऐसी कौन सी नीति और बातें है !   चाणक्य का कहना है कि .

यथा चतुर्भि: कनकं परीक्ष्यते निघर्षणं छेदनतापताडनै:।
तथा चतुर्भि: पुरुषं परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा।।
इस श्लोक के अनुसार चाणक्य का कहना है कि जब हम सोने यानि स्वर्ण की परख करते है तब उसे रगड़ते है और फिर उसे काटते है ! उसके बाद उसे आग में तपाया जाता है और फिर उसे पीट कर उसकी शुद्धता की परख जाती है ! इनमे से यदि एक भी विधि में सोना शुद्ध नहीं होता तो उसका असल रूप सामने आ जाता है ! इंसान भी ठीक ऐसे ही होते है ! इसलिए यही चार बातें ही इंसान को परखने के काम आती है !

1.त्याग की भावना..सबसे पहली और अहम बात ये है कि हमे ये देखना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति में त्याग या समर्पण की भावना है या नहीं क्यूकि जो व्यक्ति दूसरों के दुःख से खुश होते है और उनके दुःख को देख कर भी त्याग की भावना नहीं रखते वो श्रेष्ठ नहीं होते ! जिस व्यक्ति में दूसरों के प्रति त्याग की भावना हो और दूसरों के लिए अपनी ख़ुशी त्याग दे निसंदेह वो व्यक्ति ही श्रेष्ठ है ! इस भावना के बिना कोई भी व्यक्ति कभी किसी का भला सोच ही नहीं सकता ! इसलिए ये सबसे जरुरी है !

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