क्या इस कारण कुरुक्षेत्र में ही लड़ा गया था महाभारत का युद्ध?

कुरुक्षेत्र का महत्त्व 

महाभारत एवं अन्य पुराणों में कुरुक्षेत्र की महिमा के बारे में बताया गया है। महाभारत के वनपर्व के अनुसार, कुरुक्षेत्र में आकर सभी लोग पापमुक्त हो जाते हैं और जो ऐसा कहता है कि मैं कुरुक्षेत्र जाऊंगा और वहीं निवास करुंगा। यहां तक कि यहां की उड़ी हुई धूल के कण पापी को परम पद देते हैं। नारद पुराण में आया है कि ग्रहों, नक्षत्रों एवं तारागणों को कालगति से (आकाश से) नीचे गिर पड़ने का भय है, किन्तु वे, जो कुरुक्षेत्र में मरते हैं पुन: पृथ्वी पर नहीं गिरते, अर्थात् वे पुन:जन्म नहीं लेते। भगवद्गीता के प्रथम श्लोक में कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र कहा गया है।

कृष्ण जी ये बात जानते थे शायद इसलिए उन्होंने इस युद्ध को नहीं रोक क्यूकि उनकी हर योजना के पीछे कुछ अच्छा सच जरूर छुपा होता है ! वैसे कुरुक्षेत्र के बारे में ये भी ज्ञात हुआ है कि यदि कोई व्यक्ति इस स्थान पर आता है या यहाँ रहने का सोचता है और यहाँ निवास करता है तो उसके पाप भी कम हो जाते है ! पर एक सच ये भी है कि जो एक बार इस धरती पर आकर मरता है वो कभी पृथ्वी पर वापिस नहीं पनपता ! इसका अर्थ यही हुआ कि वो हमेशा के लिए लीन हो जाता है ! कुरुक्षेत्र का ये इतिहास सच में बहुत अनूठा और रहस्य्मय है !

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About Ankita Singh

2 comments

  1. There is definately a lot to learn about this topic. I love
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  2. thanks a lot

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