ये है वो शिव मंदिर है जहाँ शिवलिंग की ही पूजा नहीं..आखिर क्यूँ .?

कहते है अगर भगवान् के द्वार जाओ तो बिना पूजा किये वापिस नहीं आना चाहिए ! इसे अपशकुन समझा जाता है ! पर क्या आप जानते है एक मंदिर ऐसा भी है जहाँ केवल शिव जी के दर्शन किये जाते है उनकी पूजा नहीं की जाती ! जी हा यू तो लोग शिवलिंग की पूजा अरचना करते है पर इस मंदिर में शिवलिंग के दर्शन मात्र किये जाते है क्यूकि यहाँ पूजा अरचना करना अपशकुन समझा जाता है ! अब ऐसा क्यूँ है और ये कौन सा मंदिर है आइए हम आपको बताते है ! दरअसल ये मंदिर पिथौरागढ़ के जिला डीडीहाट में स्थित है ! कहा जाता है कि ये मंदिर एक रात में बना है और इसे एक हाथ द्वारा बनाया गया है ! यही वजह है कि इस मंदिर का नाम एक हथिया देवाल पड़ गया ! आपको जान कर हैरानी होगी पर केवल एक चट्टान को काट कर इस मंदिर को निर्माणित किया गया है और चट्टान से ही शिवलिंग भी गढ़ा गया है ! दरअसल ये मंदिर भोलेनाथ को समर्पित भेंट हेतु बनाया गया है !

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यहाँ श्रद्धालुओं का आना जाना भी लगा रहता है ! ये उत्तर भारत का अनूठा मंदिर है और इतिहास के अनुसार ये कत्यूरी के शासनकाल में बना था ! ये मंदिर बेजोड़ कला का एक नमूना है ! कहा जाता है इसकी कलाकृति लेटिन और नागर शैली की है ! इसका प्रवेश द्वार भी पश्चिम दिशा की और है ! यहाँ पूजा इसलिए भी नहीं की जाती क्यूकि यहाँ शिवलिंग विपरीत दिशा यानि दक्षिण दिशा की और स्थापित है ! कहते है ऐसे पूजा करने से अच्छा फल कभी नहीं मिलता ! वैसे अगर पुरानी कथाओ में झांक कर देखा जाये तो कत्यूरी नामक राजा ने किसी शिल्पकार को शिव जी का मंदिर निर्माणित करने के लिए बुलाया था ! उस शिल्पकार ने मात्र एक रात में मंदिर का निर्माण कर दिया और बहुत ही खूबसूरत कलाकृति की जो राजा को बेहद पसंद आई ! राजा ने पहले तो उस शिल्पकार को बहुत सारे उपहार दिए ! पर दोबारा कोई ऐसे अनूठे मंदिर का निर्माण न कर सके इसलिए उसके हाथ कटवा दिए ! इस घटना को ही अपशकुन मान कर वहां की प्रजा ने मलिका तीर्थ पर स्नान करना छोड़ दिया और साथ ही पूजा करना भी !कितनी हैरानी की बात है कि गलती तो राजा ने की पर अपशकुन शब्द मंदिर के लिए सिद्ध हो गया ! वैसे साधारण सा दिखने वाला ये मंदिर में असल में कला कृतियों से भरा हुआ है ! इतिहासकारो का मानना है कि ऐसी हस्त कला कही और देखने को नहीं मिल सकती ! पर शिव जी का ये अनूठा मंदिर आज भी अपने भक्तो की पूजा से वंचित है !

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