नागा साध्वी से जुडी ये 10 बातें जानकार हैरान रह जाएगे आप …

हमारे समाज में बहुत सी महिलाएं ऐसी है जो सन्यासिन बन कर अपना जीवन व्यतीत करना चाहती है और सन्यासिन जीवन को ही अपना लक्ष्य बना लेती है ! जी हा आज हम आपको बताते है कि सन्यासिन बनना इतना भी आसान नहीं है और इसमें बहुत कठिन तप करना पड़ता है ! अगर महिला नागा सन्यासिन की बात की जाये तो महिला नागा सन्यासिन का पूरा दिन भगवान् का जप करने में निकल जाता है ओर इन सन्यासिन को ब्रह्म मुहूर्त यानि सूर्य उदय से पहले उठना होता है ! इसके बाद अपने कार्य सम्पन्न करके ये भगवान् शिव जी की पूजा करती है ! फिर शाम को दत्तात्रेय भगवान् का जप करती है ! ओर इसके बाद शयन की स्थिति में विश्राम करती है ! वैसे आपको बता दे महिला नागा सन्यासिन बनना इतना भी आसान नहीं क्यूकि इससे पहले अखाड़े के साधु संत महिला के परिवार और जीवन की जांच पड़ताल करते है ! सन्यासिन बनना कोई पल भर का काम नहीं है इसके लिए कम से कम 6 से 12 साल तक कठिन ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है ! इसके बाद भी जब तक गुरु को इस बात का यकींन न हो जाये कि महिला पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन कर सकती है तब तक उसे दीक्षा नहीं दी जाती !

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महिला नागा सन्यासिन माथे पर तिलक और एक चोला धारण करती है वो भी भगवे या सफ़ेद रंग का ! यू तो रंग बिरंगे वस्त्र महिलाओं को बहुत भाते है पर सन्यासिन जीवन में महिलाओं को केवल भगवे या सफ़ेद रंग ही ग्रहण करने पड़ते है ! ये तो कुछ भी नहीं महिला नागा सन्यासिन बनने से पहले महिलाओं को खुद का ही पिंडदान करना पड़ता है और तर्पण करना पड़ता है ! जो एक साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं है ! इस संसार में पैसा किसको पसंद नहीं और मोह माया का लोभ तो सबको है पर सन्यासिन जीवन में ये सब कुछ त्यागना पड़ता है ! महिला को अपने परिवार और समाज से हर मोह त्यागना पड़ता है ! तब जाकर ये साबित होता है कि वो महिला पूरी तरह से नागा सन्यासिन बनने को तैयार है ! इसके बाद ही उसे गुरु सन्यास की दीक्षा दी जाती है ! जिस अखाड़े से महिला सन्यास की दीक्षा लेना चाहती है उसके आचार्य महामंडलेश्वर ही उसे दीक्षा देते है ! अब वो कार्य जो शायद कोई आम महिला नहीं कर सकती ! जी हा गौरतलब है कि महिला नागा सन्यासिन बनने से पहले महिलाओं को मुंडन करवाना पड़ता है और नदी में स्नान करवाया जाता है ! इस दुनिया में केश महिला को सुन्दर दिखाने में महत्वपूर्ण रोले अदा करते है पर यदि किसी महिला या लड़की को अपने सुंदर केश त्यागने पड़े तो इससे ये बात जाहिर हो जाती है कि अब वो इस दुनिया से परे जा चुकी है ! अखाड़े में सन्यासिनो को पूरा सम्मान दिया जाता है ! अंत में जब महिला नागा सन्यासिन बन जाती है तो अखाड़े के सभी साधु संत उन्हें माता कह कर पुकारते है ! अब तक जिस जीवन के बारे में यहाँ बताया गया है वो कठिन जरूर है पर जो निश्छल और दृढ़ मन से इस जीवन को ग्रहण करने की ठान लेते है उनके लिए हर मुश्किल आसान हो जाती है ! पर ये केवल वही महिलाएं कर पाती है जिन्हे समाज में रहने की कोई इच्छा न हो और जो एकांत जीवन व्यतीत करना चाहती हो ! इसलिए सन्यासिन बनने से पहले इन सब बातों की जानकारी लेना बहुत आवश्यक है ताकि बाद में मन में किसी तरह का कोई भ्रम न रह जाये !

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