भास्कराचार्य का गुरुत्वाकर्षण का सिद्धान्त – न्युटन से पहले बताया था।

अक्सर हम सभी लोग पश्चिमी लोगों को ही विज्ञान का श्रेय देते हैं। हम यह मानते हैं कि सबसे पहले जितने भी सिद्धांत आज विज्ञान में हैं वे सभी अंग्रेजों की देन है। पर, वास्तव में ऐसा नही हैं हमारे ऋषि-मुनियों ने बहुत ही पहले अध्ययन करके यह सभी सिद्धांत सफलतापुर्वक खोज लिये थे। आज हम आपको  गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे न्युटन से पहले भास्कराचार्य जी ने खोज लिया था, औऱ दुनिया के समाने रखा।

BHASKAR

खगोल विज्ञान को वेद का नेत्र कहा गया, क्योंकि सम्पूर्ण सृष्टियों में होने वाले व्यवहार का निर्धारण काल से होता है और काल का ज्ञान ग्रहीय गति से होता है। अत: प्राचीन काल से खगोल विज्ञान वेदांग का हिस्सा रहा है। ऋग्वेद, शतपथ ब्राहृण आदि ग्रथों में नक्षत्र, चान्द्रमास, सौरमास, मल मास, ऋतु परिवर्तन, उत्तरायन, दक्षिणायन, आकाशचक्र, सूर्य की महिमा, कल्प का माप आदि के संदर्भ में अनेक उद्धरण मिलते हैं। इस हेतु ऋषि प्रत्यक्ष अवलोकन करते थे। कहते हैं, ऋषि दीर्घतमस् सूर्य का अध्ययन करने में ही अंधे हुए, ऋषि गृत्स्मद ने चन्द्रमा के गर्भ पर होने वाले परिणामों के बारे में बताया। यजुर्वेद के 18वें अध्याय के चालीसवें मंत्र में यह बताया गया है कि सूर्य किरणों के कारण चन्द्रमा प्रकाशमान है।

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